Sunday, May 26, 2019

6 पेटेंट गौमूत्र के जिससे पूरी दुनिया में भारतीय गौमाता की ताकत गूंजती है

6 पेटेंट गौमूत्र के जिससे पूरी दुनिया में भारतीय गौमाता की ताकत गूंजती है - शेयर करें

भारतीय गाय पर यह 6 पेटेंट जो कैंसर से लेकर DNA तक को ठीक करने के लिए अमेरिका और चीन ने ले रखे इस बात का प्रमाण है कि भारत के लोगो से लेकर यहाँ की सरकार गाय की हत्या होने दे रही है ताकि अंतराष्ट्रीय माफिया गौ के गव्यों के आधार पर दवा से लेकर बाजार खड़ा करें।
और जो मूर्ख मैकॉले मानस की औलादें गौमूत्र ओर हँसा करती है है वो इन पेटेंट को सर्च कर अपना फफूंद वाला मुहँ बंद रखे।

*सर्च करें -* *_इन भारतीय गाय पर इन 6 पेटेंट को_*

1️⃣  US Patent - 6896907 BE
https://patents.google.com/patent/US6896907B2/en

2️⃣ US patent - 6410059
https://patents.google.com/patent/US6410059B1/en

3️⃣  US patent - 7718360
https://patents.google.com/patent/US7718360B2/en

4️⃣  US patent - 7235262
https://patents.google.com/patent/US7235262B2/en

5️⃣  US patent - 7297659
https://patents.google.com/patent/US7297659B2/en

6️⃣  China patent - 100475221
https://patents.google.com/patent/CN100475221C/en

जय #गौमाता #राष्ट्रमाता... वन्दे मातरं...
जय #राजीववाद

Farmer sobbing while selling cow

Farmer sobbing while selling cow


Check out @HatindersinghR’s Tweet:

https://twitter.com/HatindersinghR/status/1127042046152208385?s=09


Let's Start The Day With This Video Of  A Farmer Family Selling Their Cow Due To Financial Crisis,

The Farmer Meeting Him One Last Time Before The New Owner Takes Her With Him.
His Younger Brother Too Sobbing On The Side.

Can't Imagine The Bonding Between The Family And Cow.
😥 https://t.co/D51iCp11tC

दूध का मसला है क्या?

दूध का मसला है क्या?

भारतीय दिनचर्या ने दूध का बहुत अधिक महत्व है यहां दूध का उपयोग जी भर कर किया जाता है। दूधका उत्पादन गाय और भैंस से होता है जो  मुख्यतः गांव देहात में रहती है।

शहरों के बड़ा होने से गांव छिटक कर शहरों से दूर चले गए हैं। इसमे व्यापारी के लिए एक बड़ी संभावना उभर कर आ गयी है।व्यपारी को तो दरार दिखनी चाहिए वो उसका इंडिया गेट तो अपने आप बना ही लेता है।

यह बड़ी स्थापित बात है कि दूध निकाले जाने के साथ ही बैक्टीरियल एक्टिविटी होने के कारण अपने आप विघटित होने लगता है और साधारण तापमान पर दूध को घंटे डेढ़ घंटे के अंदर अंदर रसोईघर में पहुंच जाना चाहिए गर्म होने के लिए।

लेकिन हमने अपनी टाउन प्लानिंग इतने बेकार तरीके से की है कि सेक्टर मोहल्ले वालों के घूमने और कुत्ते हंडाने के लिए बड़े बड़े पार्क तो बना दिये हैं लेकिन आबादी के साथ पांच दस्य एकड़ जमीन बचा कर नही रखी जिसे गौपालकों के लिए रिजर्व किया जाता और सभी लोग लोकल रहते हुए अपने सामने दूध का आनंद ले सकते।

खैर कोई बात नही अब हमारे पास और बहुत जुगाड़ विकसित हो चुके हैं जैसे हाइड्रोजन पर ऑक्साइड, फोर्मलिन,कास्टिक जिनके द्वारा विषम मौसम में दूध को लगा कर उसे ट्रेवल कराया जा सकता है।

मैने 1998 में एक डेयरी प्रॉसेसिंग प्लान्ट में ट्रेनिंग की और मैं यह सोच कर हैरान था के रोहतक शहर के दूध की पूर्ति बीकानेर और दिल्ली मदर डेयरी सेआए हुए टैंकर्स पूर्ति करते थे।

फिर ये रोहतक वाले अपनी गाय भैंस का क्या करते हैं। दो तीन गाड़ियां सिम्बोलिक रूप से इधर उधर घूम कर दूध एकत्र करके लाती थी।मेरी ड्यूटी वहीं लगी हुई थी जहां से दूध आता था सो दूध ढोने वाले टैंकर्स और उनके ड्राइवर्स से मेरी पहचान हो गयी।

दिल्ली में दूध थोड़ी न उत्पादन हो रहा है लेकिन मदर डेयरी का टैंकर रोहतक को दूध पिला रहा है। इस दूध को उठा कर घूमने फिरने में ही सब गड़बड़झाला है।

आबादी के साथ गौपालक और गाय को इंटेग्रेट करने से सारा समाधान हो सकता है लेकिन नही इसमे कॉरपोरेट का इंटरेस्ट हर्ट होता है। आम जन मजबूत नही होना चाहिए।

मिल्क प्लांटों में दूध के साथ केवल बदतमीजी और बदमाशी होती है। इसमें इतना गड़बड़ सौदा है कि पंजाब से चले दूध के टैंकर जिनके सैंपल दिल्ली में फेल जो जाते हैं वो दूध फेंकते थोड़ी न है वो रोहतक हिसार या कहीं और जा कर पास हो जाते हैं।

आज दूध केवल बीमारी बांटने का सबब बना दिया गया है। गाय सड़क पर फिर रही है, आप जितना मर्जी दूध आर्डर कर दीजिये पनीर आर्डर कर दीजिए आपको मिलेगा।

कहाँ से ला रहे हैं, बताते हैं पाउडर से बनाते हैं, पाउडर की पूछो तो कहते हैं कि वेंडर से खरीदा है, वेंडर की पूछ लो तो कहते हैं कि तुम गद्दार हो, देश मे डिस्टर्बेंस फैलाना चाहते हो।

अबे हरामियों पशुपालक मर रहा है, पशु मर रहे हैं तुम्हारा मार्किट साइज बढ़ता जा रहा है, उत्पादन और खपत में इतना बड़ा गैप है। सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया है कृषि मंत्रालय और फ़ूड प्रोसेसिंग मंत्रालय ने जिसमे कृषि मंत्रालय से बताया है कि देश मे।दूध का उत्पादन इतना होता है , दूसरे मंत्रालय ने बताया हुआ है के हम डेली इतना प्रोसेस करके दूध सप्लाय करते हैं। दोनों में फर्क घातक और सर फोड़ू स्तर का है।

देश के सारे साइंसदान मुहं में दही जमा कर मोटी तनख्वाह और  फैसिलिटीज का एंजॉय करने में जीवन बिता रहे हैं,मोटे मोटे रिसर्च पेपर छाप कर ईगो बड़ी कर रखी है एवेरेस्ट से ऊंची। एक लीटर दूध की कीमत पशुपालक को क्या मिलनी चाहिए यहां तक अभी कोई स्पष्ठ तौर पर नही पहुंच पाया है।

देसी गाय जीरो डिग्री तापमान से लेकर 48 डिग्री तापमान तक खुले में रह कर भूसा खा कर 2 लीटर दूध देती है उसको ये घाटे का सौदा बताते हैं। दूसरी तरफ जो ये गाय बताते हैं उसको पालने में किसान घुस जाता है उसके दूध को पी कर उपभोक्ता घुस जाता है।

गाय सड़क पर है,किसान बेहाल, पशुपालक खत्म सिंह और ये कागजी शेर कहते हैं हम दूध उत्पादन में नम्बर वन।

अब नई स्कीम लाये हैं फोर्टीफिकेशन मतलब केवल बड़ा कॉरपोरेट ही दूध बेच पायेगा क्योंकि और किसी के बस का ही नही है तकनीक को मैनेज करना। विटामिन आएंगे बाहर से।

सभी वेंडर्स का FSSAI पंजीकरण मतलब बन्दर रोटी खायेगा बिल्लियां केवल मुहं ताकेंगी। व्यवस्था को इतना कॉम्प्लेक्स ही क्यों बनाया के इन सब रफडों की जरूरत पड़ रही है।

टाउन प्लानिंग वालों को पहले पकड़ो, सालों ऐसे शहर ही क्यों बसाते हो जो प्राइमरी उत्पादक से दूर हो जाएं।

सब समस्याओं का सरल इलाज है लोकल उत्पादन लोकल खपत, पंचकूला का दूध पंचकूला के आस पास से आना ही सुनिश्चित किया जाए। ताकि लोग खुद अपना क्वालिटी कंट्रोल विकसित कर सकें।

इससे प्राइमरी उत्पादक को रेस्पेक्ट रिवॉर्ड और रिकॉग्निशन तीनों सुनिश्चित किये जा सकेंगे। गांव और शहर एक दूसरे के पूरक बन जाएंगे और ये देश बसा रहेगा।

Petition filed by Famous Lawyer Vibhor Anand ji with PMO, to seek justice for thousands of Gorakshaks killed in 1966 protest

Petition filed by Famous Lawyer Vibhor Anand ji with PMO, to seek justice for thousands of Gorakshaks killed in 1966 protest

5000 Hindu Sadhus were brutally murdered by Indira Feroz Gandhi on 7th November 1966 in front of the parliament.

They are awaiting Justice even after 53 years. Petition filed with @PMOIndia seeking SIT probe.

Sign and support us in this fight 👇.

https://t.co/uNQ4QdNDy0

https://t.co/OLRurDXSZk

Check out @vibhor_anand’s Tweet:

https://twitter.com/vibhor_anand/status/1127512744503042048?s=09

मोदी जी को पत्र-पंचगव्य चिकित्सा पद्धतीको राजाश्रय मिले


प्रधान सेवक,
परम आदरणीय,
श्री नरेन्द्र मोदी साहेब 
विषय -पंचगव्य चिकित्सा पद्धतीको राजाश्रय मिले*


महोदय २०१४ मे जबसे आपने यह पद संभाला है,, गोसेवक और गोभक्तोकी *पंचगव्य चिकित्सा पद्धती* **को राजाश्रय मिलनेकी आशा बढ गयी है और २०१९ के बाद तो ये सपना जरुर पुरा करोगे यह आशा है और आप निराश नही करोगे...... *पंचगव्य कॅन्सर उपचार थेरापी* एक अत्यंत उपयुक्त चिकीत्सा पद्धती है...देशमे एक तरफ रासायनिक खाद,घातक रासायनिक कीटकनाशक दवाईया,जहरिले पेस्टीसाईड ईनका प्रयोग दिन ब दिन बढ रहा है,, उससे अन्न, फल, सब्जीया, दुध, पाणी,मे विषेले तत्व अधीक मात्रा मे पाए जा रहे है, ऐसे दुषीत खाद्यपदार्थ, धुम्रपान, मद्यपान, मांसादी,विदेशी गायका दुध/घी का सेवन, गुटखा, तंबाखू, आदी विषेले मुखवास,,, टीव्ही, मोबाईल, कॉम्प्युटर, आदी उपकरणो द्वारा फैलनेवाली रेडीओधर्मीता के दुष्परिणाम और अनेक कारणोसे *केन्सर पिडीतो की संख्या* दिन प्रती दिन तेजीसे बढ रही हे.           केन्सर उपचार की आधुनीक चिकीत्सा पद्धती ईतनी महंगी,दर्दनाक एवम भयंकर दुष्परिणाम युक्त है,, मध्यम और निम्न अर्थव्यवस्था मे जिने वाला *आम आदमी तो बिना ईलाज के ही दम तोड देता ह**............. .................ऐसे अधंकारमय और निराशा मय जिवनमे एक आशा, एक उजाला पंचगव्य आयुर्वेद केन्सर चिकीत्सा पद्धती हो सकती है... ईस पद्धतीमे भारतीय देशी गायका ताजा गोबर, गोमुत्र, दुध, दही और घी इन पाच तत़्वोका ऊपयोग किया जाता है,, यह उपचार पद्धती एकदम सस्ती, सहज सुलभ उपलब्ध एवम दुष्परिणाम रहीत है. अनेक प्रगत रास्टोके संशोधनमे गोमुत्र मे केन्सर विरोधी घटक पाया गया है,, पंचगव्य मे केन्सर मिटानेकी अदभुत क्शमता है आधुनीक केन्सय चिकित्सा मे केमोथेरपी, रेडीएशन थेरापी आदी उपचार के फायदे कम और दुष्परिणाम ज्यादा है, ईसके साथ अगर पंचगव्य थेरापी का उपयोग किया जाय तो दुष्परिणाम कम होते है. रुग्ण को शांती एवम प्रसन्नता का अनुभव मिलता है.... ईसलिए आधुनीक एवम पौराणिक चिकीत्सकोने आपसी इगो -अहंकार छोडकर मानव सेवा के महान कार्य मे एकजुट होकर संशोधन मे सहयोग करे तो कॅन्सर चिकीत्सा मे आश्चर्य जनक परिमाण मिल सकते है........................... अखिल भारतीय क्रुषी गो सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवम पंचगव्य कॅन्सर उपचार थेरापी के प्रेरणास्थान श्री केशरीचंदजी मेहता जी के मार्गदर्शन एवम गुरुभगवंतो के क्रुपा आशीर्वाद से वाघलधरा (गुजरात )मे आर् एम् डी पंचगव्य कॅन्सर होस्पीटल २००८मे शुरु हुवा,, ८० बेडका भव्य होस्पीटल, भोजनशाला, गोशाला, मंदिर, देरासर, आदी सभी सुविधा युक्त श्री विमलनाथ प्रभुके पावन सानीध्य मे कार्यरत है,,                     श्री केशरीचंदजी के मार्गदर्शन और श्री जयुभाई और बिपीनभाई(वैद्यराज ) ईनके सानीध्य मे मुझे केन्सर रूग्णसेवा का लाभ मिला.       यह अमुल्य और अत्यंत असरदार थेरापी सारे विश्व मे फैले, सभीको सहज सुलभ उपलब्ध हो, ईस भावनासे मै ईसके प्रचार एवम प्रसार कार्य मे जुडा हु,,, पंतप्रधान, आरोग्य मंत्री, एम पी, एम एल ए, दानशूर व्यक्ती हर प्रांतमे वाघलदरा जैसा पंचगव्य कॅन्सर होस्पीटल निर्माण करनेमे सहायक बने तो सारे विश्व मे भारत का नाम बढेगा, ईसमे गोसेवा, रुग्ण सेवा, जनसेवा, वैय्यावच सेवा आदी का पुण्यका लाभ मिलेगा। .      क्रुपया सहयोग और दानकी भावना रखे तो यह महान कार्य आसान हो सकता है,, शासनमे शामील मंत्री महोदय, एम पी, एम एल ए, आदी घटक भी ईस भारतीय पावन चिकीत्सा पद्धती के बढा़वा हेतु शासन द्वारा सहयोग करे यही प्रार्थना 🙏👏डॉ बन्सीलाल जैन, आयुर्वेद पंचगव्य चिकित्सक,,९४२२७७४५७९,,,,,,,, क्रुपया  यह मेसेज अपने सभी ग्रुपमे फारवर्ड करे 🙏👏

गौ पालक किसान ठाकुर कमल सिंह जी को पदमश्री

महामहिम  राष्ट्रपति जी के द्वारा " पदम श्री" 2019 से विभूषित  "गौ पालक किसान  ठाकुर कमल सिंह चौहान जी को  बहुत-बहुत शुभकामनाएं  भारत के सभी किसानों को गर्व है.......... ##भारतीय किसानों के लिए मिसाल पेश की हमारे किसान श्री कमल सिंह चौहान जीने हरियाणा में ऑर्गेनिक खेती एवं बेबी कॉर्न एक्सपोर्ट करके अनूठी मिसाल पेश की भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदम श्री सम्मान से विभूषित ठाकुर कमल सिंह चौहान जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं साथ ही भारतीय किसानों के लिए एक नायाब उदाहरण पेश किया भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि बेहद आवश्यक अंग है इसलिए भारत में किसानों की अहम भूमिका समाज एवं सरकार को समझना चाहिए जय जवान जय किसान का नारा तभी बुलंद होगा जब देश में ऑर्गेनिक खेती होगी देश समृद्ध होगा भारत भूमि में विषय ले केमिकल युक्त रसायन से खेतों को बचाया जाए तभी जाकर देश की धरती सोना उगले गी आधुनिकता में हमारी जमीन है सोना की जगह विश्व गर्ल रही है जिससे आए दिन कैंसर मधुमेह हॉट की बीमारियां किडनी लीवर से संबंधित हजारों बीमारियां रही है इसलिए हमें केमिकल मुक्त भारत ऑर्गेनिक युक्त भारत बनाना होगा और गाय की शरण में किसान को जाना होगा उसके गोबर और गोमूत्र के मिश्रण से एक गाय से 1 एकड़ खेती का प्रावधान किसान को समझना होगा तभी जाकर देश समृद्ध होगा स्वस्थ होगा रोजगार युक्त होगा भ्रष्टाचार मुक्त होगा विषैले केमिकल से सावधान रहें.......... हम सभी किसानों को बहुत बहुत गर्व है भारतीय किसान ऐसे ही कीर्तिमान स्थापित करते रहें बहुत-बहुत शुभकामनाएं आज दिल्ली में माननीय ठाकुर कमल सिंह चौहान जी को सम्मान करने का अवसर प्राप्त हुआ जय जवान जय किसान स्वस्थ भारत से समृद्ध भारत रोजगार युक्त भारत भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की प्रकल्प में हम सब से भागी बने वंदे मातरम गौरक्षा हेल्पलाइन टीम दिल्ली व्हाट्सएप नंबर 9999092304 8800130057

Cow therapy cures cancer, claims GoVigyan Anusandhan Kendra

Cow therapy cures cancer, claims GoVigyan Anusandhan Kendra

Chaitanya Deshpande | TNN | May 7, 2019, 12:56 IST

Source-
https://timesofindia.indiatimes.com/city/nagpur/cow-therapy-cures-cancer-claims-govigyan-anusandhan-kendra/articleshow/69208319.cms

NAGPUR: Entering the debate on curing cancer using ‘cow therapy’, the GoVigyan Anusandhan Kendra (GVAK), an institute dedicated to scientific research on cow-based lifestyle, has claimed that cow therapy cures cancer.

Officials of the institute, based at
Deolapar, 88km from Nagpur, brought some patients, many case studies, scientists and doctors from various central laboratories before the media on Monday. They countered the statement by oncologists of Tata Memorial Center, Mumbai, that there was not a shred of evidence to show that cow urine or other cow-based products are useful in cancer treatment.


A team of doctors from Tata Memorial Centre had slammed BJP’s Bhopal candidate Sadhvi Pragya Thakur for ‘misguiding’ patients after she claimed to have beaten cancer through a combination of cow urine and other cow products. Cow therapy includes consumption of distilled form of cow urine (Gaumutra Ark) along with a range of tablets and powders made of cow milk, curd, ghee, and cow dung.

“We have hundreds of case studies from last 20 years to show that cancer has been cured completely by these cow-based products,” said Vaidya Nandini Bhojraj, dean of GVAK. “Just like any other doctor practicing modern medicines, we can claim that cow therapy offers a near-normal, peaceful, painless and progressive life for cancer patient,” she said.


President of GVAK Dr Hemant Jambhekar claimed that the institute has proper documentation of many patients declared officially ‘cancer free’ by Rashtra Sant Tukdoji Regional Cancer Hospital & Research Centre, Nagpur, after undergoing treatment at GVAK.


“We have case studies with us. Many patients were referred for chemotherapy and radiation. They came to us when their cancer was in second or third stage. Most of them were cured. These include patients of breast cancer, oesophagus cancer, oral cancer, and cervix cancer,” he said.

Eighty-five-year-old Parvatibai Burde, a patient of cervix cancer, claimed before the media that she was cured by cow therapy. “I was diagnosed with cancer in 2016, when I was 83. After six cycles of radiation, I refused that painful treatment and came to GVAK. Here, I am undergoing only cow-therapy from last three years and I am absolutely fine,” she said. Seventy-year-old Shalini Tarsekar, who had breast cancer, also shared a similar experience.


Dr Mahendra Darokar, senior principal scientist, who leads the department of Molecular Bio-Prospection at Central Institute of Medicinal and Aromatic Plants (CIMAP), a Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) affiliate institute, said cow urine has its own anti-cancer activity. “It has been proven that cancer-like lifestyle based diseases are due to free radicals and we need antioxidants to nullify them,” he said. Dr Darokar added cow urine is way better than alkaline water, which is gaining huge popularity in modern medicine these days.


Coordinator of GVAK Sunil Mansinghka said they have five international patents on this subject. “Our research work provided us amazing results. It is not only us who were impressed with the results but the entire world had to take notice of our research. US and China have awarded us patents for our research on cow urine as medicines for humans,” he said.