Sunday, July 26, 2020

अधर्मी के साथ अधर्म करना

यदि अर्जुन, निहत्थे कर्ण पर बाण नही चलाता तो कर्ण का मरना असंभव था...! कर्ण का कवच भी मांग लिया गया !
गदा युद्ध मे नियमों के विरुद्ध भीम जंघा पर वार नही करता तो दुर्योधन का मरना असंभव था...!

रणभूमि मे गंगापुत्र भीष्म के सामने शिखंडी को ढाल नही बनाया जाता तो भीष्म का मरना असंभव था....!

"अश्वथामा मारा गया" कहते वक्त शंखनाद करके युद्धिष्ठिर के वचन को दबाया नही गया होता तो द्रोणाचार्य का वध नही होता....

यदि  वासुदेव के कहने पर सूर्यदेव समय से पहले सूर्यास्त का नाटक नही करते तो जयद्रथ नही मरता....!

अधर्मी के साथ अधर्म करना , छल करना,कपटपूर्ण व्यवहार करना सब नीतिसंगत है...!

यही धर्मयुद्ध है, धर्म की जीत हुई है.........!!! ❤️❤️
जय श्री कृष्ण 🙏

पांच प्रकार की कपिला गाय

*शास्त्र के अनुसार गौमाता की **नाम और उसकी महिमा*  सूर्य के सात किरण है ।उन सभी किरणों के रंग की पता आसमान में कभी-कभी दिखाई देने  वाला इंद्रधनुष के रंग से पता चलता है। क्योंकि इंद्रधनुष का रंग सूर्य से निकलने वाले 7  किरणों के रंग पर ही आधारित रहता है।
उसी तरह इस संसार में जितने प्राणी है। उन सभी प्राणियों में गाय ही एकमात्र ऐसी प्राणी है। जिसका सूर्यकेतु नाड़ी के माध्यम से सीधा संबंध सूर्य से होने के कारण वह भी सात रंग की होती है।
बाकी मानव सहित अन्य सभी जितनी प्राणी इस संसार में है वह सभी दो रंग या तीन रंग के ही होते हैं।
 गाय के वह सात रंग इस  प्रकार है :-
(१) कुछ गाय ताम्र यानी लाल अर्थात स्वर्णिम रंग की होती है।(२) कुछ गाय काली रंग की होती है।
(३) कुछ गाय श्यामा रंग की होती है।
(४) कुछ गाय नीलवर्ण की होती है ।
५)कुछ गाय सफेद रंग की होती है।
(६) कुछ गाय आपस में मिलाजुला दो रंग की होती है । जैसे :-काला और सफेद का धब्बा या सफेद पर लाल रंग की धब्बा वाली गाय।
 इस तरह  से सात वर्ण की गाय इस धरती पर पाई जाती है ।

इन सभी रंगों के गायकी शास्त्र अनुसार अपना अलग अलग महत्व होता है ।
उसी तरह  इन सभी गायों में कपिला रंग की गायों का विशेष महत्व होता है।
 कपिला का अर्थ है :-
वह गाय जिस के समस्त शरीर के साथ उसके सींग, उसके ओट, उसके आंख, उसके पूछ का बाल तथा उसके पांव के नाखून यानी  खुर  यह सभी अंग एक ही रंग का हो ।
उसी तरह  से पांच रंगो के आधार पर पांच प्रकार के कपिला गाय की वर्णन शास्त्र में आता है। (१)सफेद कपिला:- जिसका ऊपर वर्णित शरीर के सभी अंग  उसके सिंह ,आंख, स्थान, पूछ के बाल तथा पांव के नाखून यानी खुर  यह सभी अंग सफेद रंग का हो  वही सफेद कपिला गाय कहती हैं (२)उसी तरह  से जिस गाय के सभी अंग काला हो वह कालावर्ण कपिला गाय कहलाती है ।(३)उसी तरह  से जिस गाय के सभी अंग श्यामवर्ण का हो वही श्याम कपिला गाय कहलाती है उसी में जिस गाय के मस्तक पर चक्र या मोरपंख का चिन्ह रोम कूप में अंकित हो वही कृष्ण कपिला  गाय कहलाती है।(४) उसी तरह से जिस गाय का सभी अंग नीलवर्ण का हो वह नीलवर्ण कपिला गाय कहलाती है।(५) उसी तरह से जो गाय लाल  यानी ताम्र  अर्थात स्वर्णिम कलर का हो वह स्वर्ण कपिला गाय कहलाती है।
 उसी तरह भगवान श्री कृष्ण ने कहा :- हे पार्थ समुद्र मंथन के समय क्षीर सागर से जो मात्री सरूपा 5 गाय उत्पन्न हुई है उसके नाम इसप्रकार है । (१)नंदा:- अर्थात( आनंद देने वाली) यानी जो गाय कपिला गाय के समान हो  जिसके शरीर से गूगल के समान सुंदर सुगंध निकलता हो और वह अपने स्थान के पांच छीमरा से दूध देती हो अर्थात  उस के स्थान मैं पांच छीमरा हो वही नंदा गाय कहलाती है।(२) सुभद्रा:- अर्थात (कल्याण करने वाली) यानी जो गाय कपिला गाय के समान हो जिसके शरीर से गूगल के समान सुंदर सुगंध निकलता हो जिसके दोनों सिंह नीचे की ओर लटका हुआ और हिलता हो वही सुभद्रा गाय कहलाती ।(३) सुरभी:- अर्थात (सभी मनोकामना पूर्ण करने वाली) यानी जो गाय कपिला गाय के समान हो जिसके शरीर से गूगल के समान सुंदर सुगंध निकलता हो और जिसके मस्तक पर सूर्य और चांद के चिन्ह अंकित हो   वही सुरभि गाय कहलाती है। (४)सुशीला:- अर्थात( दिव्य शक्ति प्रदान करने वाली) यानी जो गाय कपिला गाय के समान हो जिसके शरीर से गूगल के समान सुंदर  सुगंध निकलता हो और दिन में चाहे जितनी बार दूध देती हो वही सुशीला गाय कहलाती है। (५)बहुला:-( सभी  कष्टों को दूर करने वाली) यानी  जो गाय कपिला गाय के समान हो जिसके शरीर से गूगल के समान सुंदर सुगंध निकलता हो और उसके पूछ भूमि से स्पर्श करता हो वही बहुला गाय कहलाती है। संतोष सुभाष महराजमो०-9926363485

पैर की मोच और छोटी सोच

पैर की मोच और छोटी सोच
हमें आगे बढ़ने नहीं देती,

टूटी कलम और औरों से जलन
खुद का भाग्य लिखने नहीं देती,

काम का आलस और पैसों का लालच
हमें महान बनने नहीं देता,

#गौमाता_राष्ट्रीयमाता
#गौहत्या_बंद_करो_सरकार

In Japan God Ganesha is Known as 'Kangiten' or 'Vinayakaten'.

Did you know... Friends ?
In Japan God Ganesha is Known as 'Kangiten' or 'Vinayakaten'.

‪Ganesha has been worshiped in Japan for 1000s of years & he was the family deity of Emperors of Northern court.‬

‪This Vigraha was installed as the presiding deity of Unryuin Temple in 1372 CE by Japanese Emperor Gokogon.

As per Hindu scriptures Long Ganesha resides in Cowdung (गौमय गणेश, गोबर गणेश)

गायें, ब्राह्मण, वेद, सती स्त्री, सत्यवादी, लोभरहित और दानशील संत-महापुरुष


गायें, ब्राह्मण, वेद, सती स्त्री, सत्यवादी, लोभरहित और दानशील संत-महापुरुष
*🌞🚩सनातन सारथी🚩🌞*
*12/07/2020*
🚩🌞सनातन सारथी🌞🚩
धर्म का प्रचार प्रसार

*स्कन्द पुराण में कहा गया है👇👇*
*_गोभिर्विप्रैश्च_वेदैश्च_सतीभिः_सत्यवादिभिः_*
*_अलुब्धैर्दानशीलैश्च_सप्तभि_धार्यते_मही_*
*गायें, ब्राह्मण, वेद, सती स्त्री, सत्यवादी, लोभरहित और दानशील संत-महापुरुष—इन सातों के द्वारा यह पृथ्वी धारण की जाती है अर्थात् इन पर पृथ्वी टिकी हुई है*
*इस देश में--*
*1.नित्य 35000 गाय कत्लखानों में कटती है। गौमाता केवल बछिया को जन्म दे ~ ऐसी व्यवस्था की जा रही हैं , गोधन , नंदी वर्षभ जिस पर गौमाता निर्भर हैं , उसे खत्म किया जा रहा है , गौमाता की देशीनस्लें खत्म करके विदेशी वर्णसंकर गायों को बढ़ावा दिया जा रहा है*
*2.ब्राह्मणत्व की रक्षा 
*3. वर्तमान में सारा विकास वेद विरुद्ध है।वेदों को अपने कथित विकास में रोड़ा समझा जा रहा है। कतिथ समाज-सुधारकों ने वेदों की ऋचाओं का ऐसे कुअर्थ किये हैं जिनकी आज्ञा स्वयँ वेद नहीं देते*
*4.कोई भी सती स्त्री पतिव्रता ना रहे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने ही धारा 498 को निरस्त करके व्यभिचार को मान्यता दे दी है।प्रचार तंत्र , मीडिया तंत्र के द्वारा स्त्रियों को भोग की वस्तु बना दिया गया है । और खान-पान , वातावरण भी ऐसा ही है , फिर कहाँ से कोई स्त्री पातिव्रता रहेगी ।*
*5.कोई भी सत्यवादी न रहें ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया गया है।शिक्षा,रक्षा,न्याय,स्वास्थ्य सबमें झूठ का ही बोल बाला है। आज की सारी की सारी व्यवस्थाएं जिनमे बाहरी आकर्षण दिखता हैं अंदर से पूरी तरह खोखली और झूठी हैं । आज हर मंत्री,व्यापारी, नेता,मीडिया बेहिसाब झुठ बोलते हैं ।*
*6.प्रत्येक मनुष्य को ऐसी शिक्षा ही दी जा रही है ताकि वो अर्थ और कामका ही किंकर(दास) बन कर रह जाए,लोभ उनके चित्तों में सवार है।विश्व सत्ता के इशारे पर आज हर मनुष्य लोभी बन चुका है ~ जोकि पाप की जड़ है*
*7.दानशील सन्त महापुरुष तो मिलने ही दुर्लभ है वर्तमान में क्योंकि अधिकांश में सभी अपनी पेटियां भरने में ही लगे है*
*दानशील तो छोड़ो आज* *कालनेमियो को ही समाज ने* *संत , महापुरुष या साक्षात* *भगवान ही मान लिया है*
*अरे मूर्खों! पृथ्वी के इन स्तम्भों को ही नष्ट कर दोगे तो पृथ्वी पर जीवन किस प्रकार धारण कर सकोगे*
*जय श्री राम*
*चलते रहिये🏃‍♂🏃‍♂🏃‍♂।,नमस्कार...✍”॥*
                              🚩
           ▁▂▄▅▆▇██▇▆▅▄▂▁
                     *सनातन सारथी*

HOW TO IMPROVE CHANTING ?

HOW TO IMPROVE CHANTING ?

1. Keep the cell phone away during the japa. (the world will not drown)

2. PAUSE after the first line and second line of Hare Krishna maha mantra so that the Hare doesn't overlap.

3. Focus on proper PRONUNCIATION. (Don't eat words in between)

4. Focus on 5 / 10 mantras at a time.

5.  LISTEN to the holy name.

6. VARY the intensity of chanting (before mind takes you away, you take away the mind)

7. Fake it till you make it. Act enthusiastically. STRUGGLE for Krishna

8. DON'T BE LAZY (Remember DEATH - Today is my last round)

9. Krishna is listening to you. Krishna is dancing on the tongue on the chanter.

10. Chant with PRAYERFUL MOOD (Please pick me up from this ocean of death and place me as one of the atoms at Your lotus feet; please don't let me fall into the material world's trap)

11. PPP - Posture Position Pace

12. Ideal time to chant is Brahma mahurata - early morning time- (sleep early - get up early)

13.  READ the Hare Krishna mantra to gain more attention

14.  You can use Srila Prabhupad's japa🙏🏻

#SriPadmanabhaswamy Temple. Judgement

1. A few preliminary points on the #SriPadmanabhaswamyTemple judgement - Details of parties and counsels are spelt out in Para 38. The summaries of submissions of pro-Temple counsels are captured in Paragraphs 39-42, and of counsels on the Opposite Side in Paragraphs 43-45.

https://twitter.com/jsaideepak/status/1282666296920825857?s=19

Padmanabha Swami temple judgement