Friday, February 28, 2025

भगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 3

 भगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 3


मनुष्याणां सहस्त्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये।

यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः ॥3॥


मनुष्याणाम् मनुष्यों में; सहस्त्रेषु-कई हजारों में से; कश्चित् कोई एक; यतति-प्रयत्न करता है; सिद्धये-पूर्णता के लिए; यतताम्-प्रयास करने वाला; अपि-निस्सन्देह; सिद्धानाम्-वह जिसने सिद्धि प्राप्त कर ली हो; कश्चित्-कोई एक; माम्–मुझको; वेत्ति-जानता है; तत्त्वतः-वास्तव


अनुवाद

BG 7.3: हजारों में से कोई एक मनुष्य सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है और सिद्धि प्राप्त करने वालों में से कोई एक विरला ही वास्तव में मुझे जान पाता है।


व्याख्या

 इस श्लोक में 'सिद्धि' शब्द का प्रयोग किया गया है। इस शब्द के कई गुणार्थ और अर्थ हैं। संस्कृत शब्दकोश से लिए गए सिद्धि शब्द के कुछ अर्थ इस प्रकार से हैं-आलौकिक शक्तियों की प्राप्ति, उपलब्धि, सफलता, निष्पादन, पूर्ति, समस्याओं का समाधान, कार्य को सम्पूर्ण करना, उपचार करना, लक्ष्य साधना, परिपक्वता, परम सुख, मोक्ष, असाधारण दक्षता और पूर्णता। श्रीकृष्ण अध्यात्मवाद के लिए पूर्णता शब्द का प्रयोग करते हुए कहते हैं-“हे अर्जुन! असंख्य आत्माओं में से बहुत कम अनुपात में आत्माओं को मानव शरीर प्राप्त होता है। मनुष्य जन्म पाने वालों के बीच केवल कुछ लोग ही पूर्णता के लिए प्रयास करते हैं और हजारों सिद्धावस्था प्राप्त आत्माओं में से मेरी सर्वोच्च स्थिति और दिव्य महिमा से परिचित होने वाली आत्माएँ विरली ही होती हैं।" फिर ऐसी आत्माएँ जो आध्यात्मिक अभ्यास में पूर्णता प्राप्त कर लेती हैं वे भगवान को क्यों नहीं जान सकतीं? इसका कारण यह है कि भक्ति और प्रेममयी समर्पण के बिना भगवान को जान पाना या उसकी अनुभूति करना सम्भव नहीं है। आध्यात्मिक पथ के साधक कर्म, ज्ञान, हठयोग आदि के अभ्यास के साथ भक्ति को सम्मिलित किए बिना वास्तव में भगवान को नहीं जान सकते। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने इस सत्य को कई बार दोहराया है। 


"यद्यपि वे सर्वव्यापक हैं और सभी प्राणी उनमें स्थित हैं तथापि उन्हें केवल भक्ति द्वारा ही जाना जा सकता है।" (8.22) 


"हे अर्जुन! मैं तुम्हारे समक्ष खड़ा हुआ अपने स्वरूप में जो हूँ उसे भक्ति के अलावा अन्य किसी साधन से नहीं देखा जा सकता। इस प्रकार से तुम मेरे दिव्य स्वरूप को देख सकते हो और मेरे ज्ञान के रहस्यों को जान सकते हो।" (11.54)


 "केवल प्रेममयी भक्ति से कोई यह जान पाता है कि मैं वास्तव में क्या हूँ तब वह भक्ति के माध्यम से मेरे दिव्य स्वरूप को जानकर मेरे दिव्य लोक में प्रवेश करता है।" (18.55)


 इस प्रकार से जो आध्यात्मिक साधक अपनी साधना में भक्ति को सम्मिलित नहीं करते और भगवान के संबंध में सैद्धान्तिक ज्ञान तक ही सीमित रहते हैं उन्हें परम सत्य का अनुभवात्मक ज्ञान नहीं हो पाता।


 यह कहने के पश्चात कि कई मनुष्यों में कोई एक ही उन्हें वास्तव में जान पाता है, श्रीकृष्ण अब अपनी भौतिक और आध्यात्मिक शक्तियों के आयामों का उल्लेख करना आरम्भ कर रहे हैं। वे सर्वप्रथम अपनी अपरा प्रकृति, भौतिक शक्ति का क्षेत्र जोकि निकृष्ट शक्ति होते हुए भी भगवान की शक्ति है, का उल्लेख करते हैं।


Tuesday, February 25, 2025

भगवान शिव की अद्भुत गौ भक्ति ।

 भगवान शिव की अद्भुत गौ भक्ति ।


श्री कृष्ण की लीलाओ में गौ माता को प्रधान स्थान रहा है । भगवान् विष्णु जैसे महान् गौ भक्त है उसी प्रकार श्री शंकर भी महान गौ भक्त है । पुराणों में उपलब्ध भगवान् शिव की गौ भक्ति दर्शाने वाले कुछ प्रसंग यहाँ दिए जा रहे है ।

एक बार भगवान् शिव अत्यंत मनोहारी स्वरुप धारण करके भ्रमण कर रहे थे।यद्यपि दिगंबर वेश है ,शरीर पर भस्म रमाये है सुंदर जटाएं है परंतु ऐसा सुंदर भगवान् का रूप करोडो कामदेवों को लज्जित कर रहा है।

ऋषि यज्ञ कर रहे थे और शंकर जी वहा से अपनी मस्ती में रामनाम अमृत का पान करते करते जा रहे थे। भगवान् शिव के अद्भुत रूप पर मोहित होकर ऋषि पत्नियां उनके पीछे पीछे चली गयी। ऋषियो को समझ नहीं आया की यह हमारे धर्म का लोप करने वाला अवधूत कौन है जिसके पीछे हमारी पत्नियां चली गयी। पत्नियो नहीं रहेंगी तो हमारे यज्ञ कैसे पूर्ण होंगे?

ऋषियो ने ध्यान लगाया तो पता लगा यह तो साक्षात् भगवान् शिव है। ऋषियो को क्रोध आ गया, ऋषियो ने श्राप दे दिया और श्राप से भगवान् शिव के शरीर में दाह(जलन) उत्पन्न हो गया। शंकर जी वहां से अंतर्धान हो गए। हिमालय की बर्फ में चले गए, क्षीरसागर में गए, चन्द्रमा एवं गंगा जी के पास भी गए परंतु दाह शांत नहीं हुआ। भगवान् शिव अपने आराध्य गोलोकविहरि श्रीकृष्ण के पास गए,उन्होंने गौ माता की शरण जाने को कहा। अतः भगवान् शिव गोलोक में श्री सुरभि गाय का स्तवन करने लगे। उन्होंने कहा –


सृष्टि, स्थिति और विनाश करनेवाली हे मां तुम्हें बार बार नमस्कार है । तुम रसमय भावो से समस्त पृथ्वीतल, देवता और पितरोंको तृप्त करती हो । सब प्रकारके रसतत्वोंके मर्मज्ञो ने बहुत विचार करनेपर यही निर्णय किया कि मधुर रसका आस्वादन प्रदान करनेवाली एकमात्र तुम्ही हो । सम्पूर्ण चराचर विश्व को तुम्हीने बल और स्नेहका दान दिया है । है देवि! तुम रुद्रों की मां, वसुओकी पुत्री, आदित्योंकी स्वसा हो और संतुष्ट होकर वांच्छित सिद्धि प्रदान करनेवाली हो । तुम्ही धृति, तुष्टि, स्वाहा, स्वधा, ऋद्धि, सिद्धि, लक्ष्मी, धृति ( धारणा), कीर्ति, मति, कान्ति, लज्जा, महामाया, श्रद्धा और सर्वार्थसाधिनी हो ।

तुम्हारे अतिरिक्त त्रिभुवनमें कुछ भी नहीं है । तुम अग्नि और देवताओ को तृप्त करनेवाली हो और इस स्थावर जंगम-सम्पूर्ण जगत्में व्याप्त हो । देवि ! तुम सर्वदेवमयी, सर्वभूत समृद्धिदायिनी और सर्वलोकहितैषिणी हो, अतएव मेरे शरीरका भी हित करो । अनघे ! मैं प्रणत होकर तुम्हारी पूजा करता है । तुम विश्व दु:खहारिणी हो, मेरे प्रति प्रसन्न हो । है अमृतसम्भवे ! ब्राहाणों के शापानलसे मेरा शरीर दग्ध हुआ जा रहा है, तुम उसे शीतल करो ।

गौ माता ने कहा- मेरे भीतर प्रवेश करो तुम्हे कोई ताप नहीं तापा पायेगा।

भगवान् शिव ने सुरभि माताकी प्रदक्षिणा की और जैसे ही गाय ने ‘ॐ मा ‘ उच्चारण किया शिव जी गौ माता के पेट में चले गए। शिव जी को परम आनंद प्राप्त हुआ।

इधर शिवजीके न होनेसे सरे ज़गत् में हाहाकार मच गया ।शिव के न हिने से सारी सृष्टि शव के सामान प्रतीत होने लगी। शिव जी के न होने से रूद्र अभिषेक एवं यज्ञ कैसे हो? तब देवताओ ने स्तवन करके ब्राह्मणों को प्रसन्न किया और उससे पता लगाकर वे उस गोलोकमें पहुंचे, जहाँ पायसका पङ्क, घीकी नदी, मधुके सरोवर विद्यमान हैं । वहाँके सिद्ध और सनातन देवता हाथोंमें दही और पीयूष लिये रहते हैं ।

गोलोकमें उन्होंने सूर्यके समान तेजस्वी ‘नील’ नामक सुरभि सुतको गौ माता के पेट में देखा । देवता एवं ब्राह्मणों की स्तुति विनती सुनने पर भगवान् शंकर ही इस वृषभके रूपमें अवतीर्ण हुए थे । देवता और गुनियोंने देखा गोलोक की नन्दा, उक्ति, स्वरूपा, सुशीलका, कामिनी, नन्दिनी, मेध्या, हिरण्यदा, धनदा, धर्मदा, नर्मदा, सकलप्रिया, वामनलम्बिका, कृपा, दीर्घशृंगा, सुपिच्छिका, तारा, तोयिका, शांता, दुर्विषह्या, मनोरमा, सुनासा, गौरा, गौरमुखी, हरिद्रावर्णा, नीला, शंखीनी, पञ्चवर्णिका, विनता, अभिनटा, भिन्नवर्णा, सुपत्रिका, जया, अरुणा, कुण्डोध्नी, सुदती और चारुचम्पका- इन गौओके बीचमें नील वृषभ स्वच्छन्द क्रीडा कर रहा है ।

उसके सारे अङ्ग लाल वर्णके थे । मुख और मूंछ पीले तथा खुर और सींग सफेद थे । बाएं पुट्ठे पर त्रिशूल का चिन्ह और दाहिने पुट्ठे पर सुदर्शन का चिन्ह था । वही चतुष्पाद धर्म थे और वही पच्चमुख हर थे । उनके दर्शनमात्रसे वाजपेय यज्ञका फ़ल मिलता है । नीलकी उसे सारे जगत की पूजा होती है ।


नीलको चिकना ग्रास दैने से जगत् तृप्त होता है। देवता और ऋषियोने विविध प्रकारसे नीलकी स्तुति करते हुए कहा –

देव !तुम वृषरूपी भगवान् हो ।जो मनुष्य तुम्हारे साथ पापका व्यवहार करता है, वह निश्चय ही वृषल होता है और उसे रौरवादि नरकोंकी यन्त्रणा भोगनी पडती है । जो मनुष्य तुम्हें पैरोंसे छूता है, वह गाढ़े बंधनो मे बंधकर, भूख-प्याससे पीडित होकर नरक-यातना भोगता है और जो निर्दय होकर तुम्हें पीडा पहुँचाता है, वह शाश्वती गति-मुक्तिको नहीं पा सकता । ऋषियोद्वारा स्तवन करनेपर नीलने प्रसन्न होकर उनको प्रणाम किया ।अतः वृषभ भगवान् का वाहन ही नै अपितु भगवान् शिव का अंश भी है।

श्रीशिवजी वृषभध्वज और पशुपति कैसे बने ?

समुद्र मंथन से श्री सुरभि गाय का प्राकट्य हुआ। गौ माता के शारीर में समस्त देवी देवता एवं तीर्थो में निवास किया। देवताओ ने गौ माता का अभिषेक किया और श्री सुरभि गाय के रोम रोम से असंख्य बछड़े एवं गौए उत्पन्न हुये ।उनका वर्ण श्वेत(सफ़ेद) था। वे गौ माताए एवं बछड़े विविध दिशाओ में विचरण करने लगे।

एक समय सुरभीका बछड़ा मांका दूध पी रहा था ।गौ एवं बछड़ा उस समय कैलाश पर्वत के ऊपर आकाश में थे।भगवान् शिव ने उस समय समुद्र मंथन से उत्पन्न हलाहल विष पान किया था अतः उनके शरीर का ताप बढ़ने से भगवान् शिव श्री राम नाम के जाप में लीन थे। गौ के बछड़े के मुखसे दूधकां झाग उड़कर श्रीशंकरजीके मस्तकपर जा गिरा । इससे शिवजीक्रो क्रोध हो गया,यद्यपि शिवजी गौमाता की महिमा को जानते है परंतु गायो का माहात्म्य प्रकट करने के लिए उन्होंने कुछ लीला करने हेतु क्रोध किया। शंकर जी ने कहा कि यह कौन पशु है जिन्होंने हमें अपवित्र किया? शंकर जी ने अपना तीसरा नेत्र खोला ,परंतु गौ माताओ को कुछ नहीं हुआ। शंकर जी की दृष्टि अमोघ है अतः कुछ परिणाम तो अवश्य होगा। इसलिए गौ माता शिवजी की दृष्टि से अलग अलग रंगो में परिवर्तित हो गयी। तब प्रजापतिने ब्रह्मा ने उनसे कहा-

प्रभो ! आपके मस्तकपर यह अमृतका छींटा पडा है । बछडोंके पीनेसे गायका दूध जूठा नहीं होता । जैसे अमृतका संग्रह करके चन्द्रमा उसे बरसा देता है, वैसे ही रोहिणी गौएं भी अमृत सेे उत्पन्न दूध को बरसाती हैं । जैसे वायु, अग्नि, सुवर्ण, समुद्र और देवताओंका पिया हुआ अमृत कोई जूठे नहीं होते, बैसे ही बछडों को दूध पिलाती हुई गौ दूषित नहीं होती । ये गौएँ अपने दूध और घीसे समस्त जगत् का पोषण करेंगी । सभी लोग इन गौओ के अमृतमय पवित्र दूधरूपी ऐश्वर्यकी इच्छा करते हैं ।

इतना कहकर सुरभि एवं प्रजापतिने श्रीमहादेवजी को कईं गौएँ और एक वृषभ दिया । तब शिवजीने भी प्रपत्र होकर वृषभ को अपना वहन बनाया और अपनी ध्वजा को उसी बृषभके चिह्नसे सुशोभित किया । इसीसे उनका नाम ‘ वृषभध्वज पड़ा । फिर देबताओ ने महादेवजीको पशुओ-का स्वामी (पशुपति ) बना दिया और गौओके बीचमें उनका नाम बृषभांक है रखा गया । गौएं संसार सर्वश्रेष्ठ वस्तु हैं । वे सारे जगत् को जीवन देनेवाली हैं । भगवान् शंकर सदा उनके साथ रहते हैं । वे चन्द्रमा से निकले हुए अमृत्तसे उत्पन्न शान्त, पवित्र, समस्त कामनाओ को पूर्ण करनेवाली और समस्त प्राणियोंके प्राणों की रक्षा करनेवाली हैं ।


#Mahashivratri # Shivratri #शिवरात्रि 

Monday, November 18, 2024

Covid 19 Vaccine Injuries and Deaths Awareness Press Conference

 *Live Streaming Links for the 19th November Covid 19 Vaccine Injuries and Deaths Awareness Press Conference - Please share Widely*


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Sunday, June 30, 2024

गवोपनिषद

 महाभारत में गौमाता का माहात्म्य ( गवोपनिषद्), तथा गौमाता के दैनिक जाप, प्रार्थना तथा प्रणाम के मन्त्र

महाभारत में गौमाता का माहात्म्य, तथा गौमाता के दैनिक  जाप, प्रार्थना  तथा प्रणाम के मन्त्र -


भगवान् श्री राम के गुरुदेव महर्षि वसिष्ठ जी इक्ष्वाकुवंशी महाराजा सौदास से “गवोपनिषद्” (गौओं की महिमा के गूढ रहस्य को प्रकट करने वाली विद्या) का निरूपण करते हुए महाभारत में कहते हैं –


हे राजन्! मनुष्य को चाहिये कि सदा सबेरे और सायंकाल आचमन करके इस प्रकार जप करे – “घी और दूध देने वाली, घी की उत्पत्ति का स्थान, घी को प्रकट करने वाली, घी की नदी तथा घी की भंवर रूप गौएं मेरे घर में सदा निवास करें। गौ का घी मेरे हृदय में सदा स्थित रहे। घी मेरी नाभि में प्रतिष्ठित हो। घी मेरे सम्पूर्ण अंगों में व्याप्त रहे और घी मेरे मन में स्थित हो। गौएं मेरे आगे रहें। गौएं मेरे पीछे भी रहें। गौएं मेरे चारों ओर रहें और मैं गौओं के बीच में निवास करूं”। इस प्रकार प्रतिदिन जप करने वाला मनुष्य दिन भर में जो पाप करता है, उससे छुटकारा पा जाता है। 


गौ सबसे अधिक पवित्र, जगत् का आधार और देवताओं की माता है। उसकी महिमा अप्रमेय है। उसका सादर स्पर्श करे और उसे दाहिने रख कर ही चले। प्रतिदिन यह प्रार्थना करनी चाहिये कि सुन्दर एवं अनेक प्रकार के रूप-रंग वाली विश्वरूपिणी गोमाताएं सदा मेरे निकट आयें। संसार में गौ से बढ़ कर दूसरा कोई उत्कृष्ट प्राणी नहीं है। त्वचा, रोम, सींग, पूंछ के बाल, दूध और मेदा आदि के साथ मिल कर गौ दूध दही घी आदि के द्वारा सभी यज्ञों व पूजाओं का निर्वाह करती है, अतः उससे श्रेष्ठ दूसरी कौन-सी वस्तु है। 


अन्त में वे गौमाता को परमात्मा का स्वरूप मान कर प्रणाम करते हैं - जिसने समस्त चराचर जगत् को व्याप्त कर रखा है, उस भूत और भविष्य की जननी गौ माता को मैं मस्तक झुका कर प्रणाम करता हूं॥

महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय ८० श्लोक १,२,३,४,१०,१३,१४,१५


१. उपर्युक्त “गवोपनिषद्” में से दैनिक जप के संस्कृत मन्त्र (महर्षि वसिष्ठ द्वारा उपदिष्ट) -

घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवाः।

घृतनद्यो घृतावर्तास्ता मे सन्तु सदा गृहे॥

घृतं मे हृदये नित्यं घृतं नाभ्यां  प्रतिष्ठितम्।

घृतं सर्वेषु गात्रेषु घृतं मे मनसि स्थितम्॥

गावो ममाग्रतो नित्यं गावः पृष्ठत एव च।

गावो मे सर्वतश्चैव गवां मध्ये वसाम्यहम्॥

++अनुवाद = घी और दूध देने वाली, घी की उत्पत्ति का स्थान, घी को प्रकट करने वाली, घी की नदी तथा घी की भंवर रूप गौएं मेरे घर में सदा निवास करें। गौ का घी मेरे हृदय में सदा स्थित रहे। घी मेरी नाभि में प्रतिष्ठित हो। घी मेरे सम्पूर्ण अंगों में व्याप्त रहे और घी मेरे मन में स्थित हो। गौएं मेरे आगे रहें। गौएं मेरे पीछे भी रहें। गौएं मेरे चारों ओर रहें और मैं गौओं के बीच में निवास करूं

--२. गौमाता की दैनिक प्रार्थना का मन्त्र  (महर्षि वसिष्ठ द्वारा उपदिष्ट) –


सुरूपा बहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः।

गावो मामुपतिष्ठन्तामिति नित्यं  प्रकीर्तयेत्॥


++अनुवाद = प्रतिदिन यह प्रार्थना करनी  चाहिये कि सुन्दर एवं अनेक प्रकार के रूप-रंग वाली विश्वरूपिणी गोमाताएं सदा मेरे निकट आयें


---३. गोमाता को परमात्मा का साक्षात् विग्रह  जान कर उनको प्रणाम करने का मन्त्र (महर्षि वसिष्ठ द्वारा उपदिष्ट) –


यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्।

तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥


++अनुवाद = जिसने समस्त चराचर जगत् को व्याप्त कर रखा है, उस भूत और भविष्य की जननी गौ माता को मैं मस्तक झुका कर प्रणाम करता हूं॥

क्रिपा जरुर पढें और गौ माता की सेवा करें ऐवं अपने बच्चों या छोटों से करवायें...

ॐ जय गौ राम ॐ



वसिष्‍ठ का सौदास को गोदान की विधि एवं महिमा बताना

भीष्मजी कहते हैं- राजन। एक समय की बात है, वक्ताओं में श्रेष्ठ इक्ष्वाकुवंशी राजा सौदान ने सम्पूर्ण लोकों में विचरने वाले, वैदिक ज्ञान के भण्डार, सिद्व सनातन ऋषि श्रेष्ठ वषिष्ठजी से, जो उन्हीं के पुरोहित थे, प्रणाम करके इस प्रकार पूछना आरंभ किया। सौदास बोले- भगवन। निष्पाप महर्षे। तीनों लोकों में ऐसी पवित्र वस्तु कौन कही जाती है जिसका नाम लेने मात्र से मनुष्य को सदा उत्तम पुण्य की प्राप्ति हो सके? भीष्मजी कहते हैं- राजन। अपने चरणों में पड़े हुए राजा सौदास से गवोपनिषद् (गौओं की महिमा के गूढ रहस्य को प्रकट करने वाली विद्या) के विद्वान पवित्र महर्षि वषिष्ठ ने गौओं को नमस्कार करके इस प्रकार कहना आरंभ किया- ‘राजन। गौओं के शरीर से अनेक प्रकार की मनोरम सुगंध निकलती हरती है तथा बहुतेरी गौऐं गुग्गल के समान गंध वाली होती हैं। गौऐं समस्त प्राणियों की प्रतिष्ठा (आधार) हैं और गौऐं ही उनके लिये महान मंगल की निधि हैं। गौऐं ही भूत और भविष्य हैं। गौऐं ही सदा रहने वाली पुष्टि का कारण तथा लक्ष्मी की जड़ हैं। गौओं को जो कुछ दिया जाता है, उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता। ‘गौऐं ही सर्वोत्तम अन्न की प्राप्ति में कारण हैं। वे ही देवताओं को उत्तम हविष्य प्रदान करती हैं। स्वाहाकार (देवयज्ञ) और वश ट्कार (इन्द्रयाग)- ये दोनो कर्म सदा गौओं पर अबलम्बित हैं। ‘गौऐं ही यज्ञ का फल देने वाली हैं। उन्हीं में यज्ञों की प्रतिष्ठा है। गौऐं ही भूत और भविष्य हैं। उन्हीं में यज्ञ प्रतिष्ठित हैं, अर्थात यज्ञ गौओं पर ही निर्भर हैं । ‘महातेजस्वी पुरूष प्रवर। प्रातःकाल और सायंकाल सदा होम के समय ऋषियों का गौऐं ही हवनीय पदार्थ (घृत आदि) देती हैं। ‘प्रभो। जो लोग (नव प्रसूति का दूध देने वाली) गौ का दान करते हैं वे जो कोई भी दुर्गम संकट आने वाले हैं, उन सबसे अपने किये हुए दुष्कर्मों से तथा समस्त पाप समूह से भी तर जाते हैं। ‘जिसके पास दा गौऐं हों, वह एक गौ का दान करे। जो सौ गाय रखता हो, वह दस गौओं का दान करे और जिसके पास एक हजार गौऐं मौजूद हों वह सौ गौऐं दान में दे तो इन सबको बरावर ही फल मिलता है । ‘जो सौ गौओं का स्वामी होकर भी अग्निहोत्र नहीं करता, जो हजार गौऐं रखकर भी यज्ञ नहीं करता तथा जो धनी होकर भी कृपणता नहीं छोड़ता- ये तीनों मनुष्य अर्ध्‍य (सम्मान) पाने के अधिकारी नहीं हैं । ‘जो उत्तम लक्षणों से युक्त कपिला गौ को वस्त्र ओढ़ाकर बछड़े सहित उसका दान करते हैं और उसके साथ दूध दोहने के लिये कांस्य का एक पात्र भी देते हैं वे इहलोक और परलोक दोनों पर विजय पाते हैं । ‘शत्रुओं को संताप देने वाले नरेश। जो लोग जवान, सभी इन्द्रियों से सम्पन्न, सौ गायों यूथपति, बड़ी-बड़ी सींगों वाले गवेन्द्र वृषभ (सांड़) को सुसज्जित करके सौ गायों सहित उसे श्रोत्रिय ब्राह्माण को दान करते हैं, वे जब-जब इस संसार में जन्म लेते हैं तब-तब महान ऐश्‍वर्य के भागी होते हैं। ‘गौओं का नाम- कीर्तन किये बिना न सोयें, उनका स्मरण करके ही उठें और सबेरे-शाम उन्हें नमस्कार करें। इससे मनुष्य को बल एवं पुष्टि प्राप्त होती है ।


Gavopnisad गावोपनिषद गौमाता gaumata gomata

Friday, October 27, 2023

Bill Gates

 Bill gates Experiment with Indians in 2009 -Part1 


https://twitter.com/kusumlatathakur/status/1454616730077052930?t=JKlfe1zZGVT3ZcPDgvy6VA&s=19


Bill gates Experiment with Indians in 2009, Part2-

https://twitter.com/kusumlatathakur/status/1454617023057592320?t=f6EPdceaZAi2FMY13ISy_Q&s=19

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Meet Bill Gates | The Corbett Report (48 min video)

Computer whiz kid. Talented software developer. Shrewd businessman. Benevolent philanthropist. Global health expert...

https://twitter.com/awakenindiamvmt/status/1713521289116455033?t=BLuSmcMz9h5RTQ28y-8guw&s=19


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How Bill Gates Funded NGO PATH Killed Tribal Girls In India In Unauthorised Clinical Trials

https://greatgameindia.com/bill-gates-path-tribal-girls-india/

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Innovating to zero

https://twitter.com/awakenindiamov/status/1553602366553063425?t=yS0EZg_CX9UFezaVfNfEAg&s=19

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So Bill Gates spoke to Modi in May, and Modi basically told him he can decide ("take the lead") how India's economy, healthcare, education, social life - basically everything can be run! Hey India, Bill Gates is now our unelected head! Is that OK?

https://twitter.com/Rita_Banerji/status/1266828222538407941?t=u1fCrslEuzIsJcDY3aua2g&s=19

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Bill Gates is NOT a ‘Vaccine’, Weather, Farming or Medical Expert. His only ‘Expertise’ he can claim is being an Epstein’s Island VIP Member and masquerading as a Fake Doctor…that leads to a trail of disability, death and despair. Don’t be tricked by his ‘fuzzy’ sweater imagery.

https://twitter.com/liz_churchill10/status/1715514271566577996?t=7FbZoC8POXQLBNeIbSxRDQ&s=19

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Surprised that people still trust @BillGates even after his dubious history!!!

What is the objective behind such promotions, @nasdaily ? 

What is the objective behind trapping women in the name of one-min solutions?

#ArrestBillGates

#BillGates_QuitIndia

#BillGates

https://twitter.com/awakenindiamvmt/status/1710555199620657177?t=liipOd_YDi6qgOitiVe8Fw&s=19

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PASCAL NAJADI - ARREST WEF, WHO, GAVI MEMBERS

https://twitter.com/awakenindiamvmt/status/1717406130509386107?t=2jDdZgyifxWccEkrKWOO5A&s=19

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More and more people are now speaking against #BillGates

@ShabnamPalesaMo @RobertKennedyJr @CHD_Africa

Maria Klawe, ex board member microsoft-

https://twitter.com/awakenindiamvmt/status/1711227616974319662?t=uzRlXHx-vfKpLgHQ8I4PLA&s=19

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 Africa and Asia are the playgrounds of @BillGates ' experiments - polio #vaccines gave kids #polio

@rustyrockets @nasdaily 

#BillGates 

#BillGates_QuitIndia

https://twitter.com/awakenindiamvmt/status/1710577127223890247?t=tn29VHKVz_j_dW9ijWY2Pw&s=19


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Bill Gates is a Medical Terrorist. Using Psychological Warfare…Bill Gates and Friends pulled off the Greatest Medical Hoax of our time. More than half of our World willingly took a ‘Medical Experiment’ funded by a man who whines our World has too many people ???? Incredible.

https://twitter.com/liz_churchill10/status/1714651529230061640?t=Qjex4GLoPzDD-cJBQ8yBFw&s=19

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BILL GATES WANTS TO
R E P L A C E  🧂 SALT 
WITH A SYNTHETIC 
M R N A   SALT 🧬 ?????

THEY WANT THIS IN
YOU VERY BADLY!


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 U.S. patents show CDC ownership of Coronavirus. Both China and the U.S. involved in the creation of Wuhan SARS-CoV-2. Gates and CCP controlled WHO appoints criminal Tedros. CDC, FDA, CIA, NIH, Gates, Fauci, Baric, Rockefeller are all involved in Federal Crimes.

https://twitter.com/SpartaJustice/status/1631363125269209088?t=32n37WZMMGKk2CFkIvG_og&s=19


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Worldwide Bill Gates is being accused of Pandemic Fraud and Vaccine Murder. India has two vaccine murder cases against him. In the Italian Parliament he is accused of depopulation and called a criminal. In the U.S. he is accused of mass negligent homicide.

https://twitter.com/SpartaJustice/status/1631549284402200576?t=JQlTkf3CAUPOftnnVgdOog&s=19


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“I don’t plant trees…it’s complete nonsense. Are we the ‘Science People’ or are we the Idiots?” -Idiot Bill Gates on removing all trees to save the ‘Climate’.


https://twitter.com/liz_churchill10/status/1714269504144892268?t=CDPdWwbMUmM5XGLKYrkvlA&s=19



पोलियो वैक्सीन का सच

We covered how indiscriminate unscientific repeated dosing of children with the polio vaccine in India actually caused harm.

Unfortunately, misinformed influencers played their part by pushing for these dubious products called polio vaccines. Here you can see celebrities Amitabh Bachchan @SrBachchan and Sachin Tendulkar @sachin_rt exhorting people to not just stop at 4 or 5 doses of the polio vaccine but to keep re-dosing indiscriminately. Who is responsible and accountable for this?


#POLIO

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हमारी माँ गौमाता रोज मर रही है और हम त्योहार मना रहे है

हमारी माँ गौमाता रोज मर रही है और हम त्योहार मना रहे है !!

पूजनीय गोपाल मणि महाराज ,प्रवचन - 


वीडियो-

https://youtu.be/-zgh5tTvU5U?si=Bm4jGrBNA9StNAu2


हमारी मां रोज मर रही है और सहज मौत से नहीं... बेटा खाना तब नहीं खाता है जब उसकी मां सहज मौत से मरे, लेकिन मेरी मां तड़प तड़प करके इस देश के अंदर मारी जाती है कई कई दिनों तक भूखी रखी जाती है ,उसकी टांगे तोड़ दी जाती है जहां कत्ल खानो में वह जाती है वहां भी कई दिनों तक भूखा रखा जाता है ,मशीनों के पास ले जाकर मशीनों से जकड़ करके उल्टा टांगा जाता है .खोलता हुआ पानी उसके ऊपर डाला जाता है ,जीते जी चमड़ा उसका निकाला जाता है और तड़प तड़प करके मारा जाता है. इसलिए जन्माष्टमी शिवरात्रि मनाने का हम सबको अधिकार ही नहीं है जिस घर में मुर्दा मरा पड़ा हो ,उस घर के लोग जन्माष्टमी मनाते हैं ?? जवाब दो, घर मे मा मरी पड़ी है- रामनवमी का त्यौहार मनाएंगे ?? घर में मां मरी पड़ी हो शिवरात्रि का त्योहार मनाएंगे , घर में मां मरी पड़ी हो होली का त्योहार मनाओगे , घर में मां मरी पड़ी हो दिवाली मनाओगे ??? इस देश के अंदर कोई भी त्यौहार मनाने की तब तक अनुमती नहीं है जब तक यहां गौ हत्या पूरी तरह बंद ना हो . एक लाख गाय यहां रोज कटती है हम मंदिरों में जाकर घंटे बजाते हैं ,छप्पन भोग लगाते हैं यह सब ढोंग करते हैं और अपने आप को धार्मिक होने का ढोंग रचा करते है . भाई बहनों ध्यान से सुनो यह ऋषियों का संदेश है ,हिमालय से आया है शास्त्र के द्वारा जो प्रमाणिक बातें हैं वह निवेदन है- सबसे पहले हमें अपनी माँ को बचाना चाहिए फिर जन्माष्टमी मना लेना रामनवमी मना लेना, फिर चले जाना त्रंबकेश्वर,फिर चले जाना सोमनाथ, फिर चले जाना बद्रीनाथ, फिर चले जाना गंगोत्री ,फिर चढ़ा देना गंगा जल चढ़ा देना रामेश्वरम जब तक मां का कत्ल हो रहा है तब तक यह सब करने की अनुमति नहीं है ,यह सवाल है इस देश के लोगों का, जो धार्मिक लोग है धार्मिक लोगों से सवाल है - कैसे धार्मिक है गउवे कट रही है जो धर्म की मूल है, आध्यात्म की जड़ है ,धर्म अर्थ काम मोक्ष चारों जिसके चरणों में रहते हैं, बद्रीनाथ से जगन्नाथ तक जिसके पैर की धूल चाटते हैं. इसलिए भाई बहनों चिंतन करो विचार करो कहीं हम ढोंग और पाखंड में तो नहीं फंसे हुए हैं ,कहीं हमारा धर्म दिखावा तो नहीं हो गया है ,कहीं हम धर्म के नाम पर व्यापार तो नहीं कर रहे हैं ,कहीं हम धर्म के नाम पर अपनी पूजा तो नहीं करवा रहे हैं. माला इसलिए तो नहीं पहन रहे कि लोग मेरी प्रशंसा करें, प्रतिष्ठा दे यह चिंतन का विषय है . नामदेव या तो मरी हुई गाय को जिंदा कर या कल सुबह तेरे सारे शरीर पर लिख दिया जाएगा ढोंगी भक्त ,तेरी गर्दन काट दी जाएगी ,तेरे शरीर मे हवा भरके चौराहे पर टांग दिया जाएगा और बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा जाएगा ढोंगी भक्त .और नामदेव अगर तू सच्चा भगत है कृष्ण का तो मरी हुई गाय को जिंदा कर, क्योकि कृष्ण भक्त में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वो मरी हुई गाय को जिंदा कर सके.


आप मरी हुई गाय को जिंदा मत करो आप इतना ही संकल्प लेलो की आप जहां रहते हो उस स्थान के 1 किलोमीटर के अंदर कोई गौहत्या नही होने दोगे !!!